Daily Current Affairs (Hindi) - 05.04.2018


राष्ट्रीय


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भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग

04अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग (सीसीआई) में वर्तमान दो रिक्‍त स्‍थानों तथा एक अतिरिक्‍त रिक्‍त स्‍थान को नहीं भरकर उसका आकार एक अध्‍यक्ष और छह सदस्‍य (कुल सात) से घटाकर एक अध्‍यक्ष और तीन सदस्‍य (कुल चार) करने की मंजूरी दे दी है। एक स्‍थान सितम्‍बर, 2018 में रिक्‍त होने की उम्‍मीद है, जब वर्तमान एक पदाधिकारी का कार्यकाल पूरा हो जाएगा।

  • इस प्रस्‍ताव से आयोग के सदस्‍यों के तीन पदों में कटौती हो जाएगी, जो न्‍यूनतम सरकार-अधिकतम शासन के सरकार के उद्देश्‍य को पूरा करता है।
  • देश में विलय और एकीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के सरकार के उद्देश्य के अंतर्गत मंत्रालय ने 2017 में अल्‍पतम स्‍तरों में संशोधन किया था, जो परिसम्‍पत्तियों की संगणना और ऐसे कार्यों से जुड़े एक लक्ष्‍य के कारोबार के लिए अपनाई जाने वाली युक्तियों और कार्य पद्धतियों पर लागू है। इससे आयोग में जमा करने के लिए उद्यमों के लिए अनिवार्य नोटिसों में कमी आएगी। इससे आयेाग पर पड़ने वाला बोझ कम होगा।
  • सुनवाईयों में तेजी से तब्‍दीली के कारण शीघ्र स्‍वीकृति की उम्‍मीद है, जिससे कॉरपोरेट की व्‍यवसाय प्रक्रिया तेज होगी और देश में रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।
  • इस प्रस्‍ताव से आयोग के सदस्‍यों के तीन पदों में कटौती हो जाएगी, जो कम से कम सरकार-अधिकतम शासन के सरकार के उद्देश्‍य को पूरा करता है।
  • प्रतिस्‍पर्धा कानून, 2002 के अनुच्‍छेद 8(1) में व्‍यवस्‍था है कि आयोग में एक अध्‍यक्ष होगा तथा दो से कम और छह से अधिक सदस्‍य नहीं होंगे। इस समय पद पर अध्‍यक्ष और चार सदस्‍य आसीन हैं।
  • कानून में केन्‍द्र सरकार द्वारा अधिसूचित के स्‍थान पर कम से कम दो सदस्‍यों को मिलाकर एक प्रमुख बेंच, अन्‍य अतिरिक्‍त बेंच अथवा मर्जर बेंच स्‍थापित करने की जरूरत को ध्‍यान में रखते हुए एक अध्‍यक्ष और 10 से अधिक सदस्‍य नहीं होने की आरंभिक सीमा प्रदान की गई थी।
  • प्रतिस्‍पर्धा (संशोधन) कानून, 2007 (2007 के 39) में कानून के अनुच्‍छेद 22 में बेंचों के गठन का प्रावधान समाप्‍त करने के लिए संशोधन किया गया था। इसी संशोधन कानून मेंएक अध्‍यक्ष और दो सदस्‍यों को मिलाकर प्रतिस्‍पर्धा अपीलीय न्‍यायाधिकरण का गठन किया गया। आयोग के आकार में आनुपातिक कटौती नहीं की गई और इसमें एक अध्‍यक्ष और दो से कम लेकिन छह से अधिक सदस्‍य नहीं रखने की व्‍यवस्‍था की गई।
  • आयोग अपने अस्‍तित्‍व में आने के बाद से कोलेजियम के रूप में कार्य कर रहा है। प्रतिस्‍पर्धा प्राधिकार का आकारजापान, अमरीका और ब्रिटेन जैसे अनेक प्रमुख अधिकार क्षेत्रों की तरह है।

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मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018

04 अप्रैल को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में मानव अधिकारों के बेहतर संरक्षण और संवर्धन के लिए मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018 को अपनी स्वीकृति दे दी ।

प्रमुख विशेषताएं:

  • विधेयक में आयोग के मानित सदस्य के रूप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शामिल करने का प्रस्ताव है।
  • विधेयक आयोग के गठन में एक महिला सदस्य को जोड़ने का प्रस्ताव करता है।
  • विधेयक राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तथा राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद के लिए पात्रता और चयन के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव करता है।
  • विधेयक में केन्द्रशासित प्रदेशों में मानव अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को देखने के लिए एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है।
  • विधेयक में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तथा राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि इसे अन्य आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल के अनुरूप बनाया जा सके।

इस संशोधन से भारत में मानव अधिकार संस्थानों को मजबूती मिलेगी और संस्थान अपने दायित्वों और भूमिकाओं तथा जिम्मेदारियों का कारगर निष्पादन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, संशोधित अधिनियम से मानवाधिकार संस्थान जीवन, स्वतंत्रता, समानता तथा व्यक्ति के सम्मान से संबंधित अधिकारों को सुनिश्चित करने में सहमत वैश्विक मानकों का परिपालन करेंगे।

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम. 1993 में संशोधन से राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) तथा राज्य मानव अधिकार आयोग (एसएचआरसी) कारगर तरीके से मानव अधिकारों का संरक्षण और संवर्धन करने के लिए अपनी स्वायत्तता, स्वतंत्रता, बहुलवाद तथा व्यापक कार्यों से संबंधित पेरिस सिद्धांत का परिपालन करेंगे।


भारत- विश्व


खाद्य सुरक्षा और संबंधित क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और अफगानिस्तान के बीच सहयोग व्यवस्था

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्रालय के भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) तथा अफगानिस्तान के कृषि, सिचाई और पशुधन मंत्रालय के बीच खाद्य सुरक्षा और संबंधित क्षेत्रों के लिए सहयोग व्यवस्था पर हस्ताक्षर को स्वीकृति दे दी है।

सहयोग के क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सूचना तथा संचार आदान-प्रदान के लिए व्यवस्था बनाना।
  • हित के चिन्हित विषयों, विशेष रूप से आयात प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण संचालन, सैम्पलिंग, जांच, पैकेजिंग तथा लेबलिंग, पर तकनीकी आदान-प्रदान में सहायता।
  • संयुक्त संगोष्ठियों, कार्यशालाओं का आयोजन, यात्राओं, व्याख्यानों तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि में सहायता करना।
  • समझौते में शामिल पक्षों की जिम्मेदारियों के अंतर्गत हित के अन्य विषय जिसे पारस्परिक तौर पर निर्धारित किया जाएगा।
  • यह सहयोग व्यवस्था सूचना साझा करने, प्रशिक्षण तथा क्षमता सृजन उपायों तथा खाद्य सुरक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक दूसरे के श्रेष्ठ व्यवहारों को जानने में सहायक होगी।

आर्थिक


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बंदरगाह एवं तटीय बुनियादी ढांचे की क्षमता वृद्धि पर क्षेत्रीय सम्‍मेलन

03-04 अप्रैल के दौरान विशाखापत्‍तनम में एशियन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक (एआईआईबी) की तीसरी वार्षिक बैठक से पहले ‘बंदरगाह एवं तटीय बुनियादी ढांचे की क्षमता वृद्धि’विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्‍मेलन का आयोजन हुआ ।

  • इस दौरान विशेषकर सागरमाला परियोजना, बंदरगाह एवं तटीय बुनियादी ढांचा तथा नियामकीय मुद्दों, नीली अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देने के लिए तटीय क्षेत्रों में निवेश, शिपिंग परितंत्र विकसित करना-जहाज मरम्‍मत एवं ड्राई डॉक, अंतर्देशीय जलमार्गों एवं तटीय शिपिंग के लिए रूपात्‍मक बदलाव को उत्‍प्रेरित करने और भारत के नौवहन सहायता बुनियादी ढांचे- कंटेनरीकरण, बंकरिंग एवं ड्रेजिंग को मजबूत करने पर प्रकाश डाला गया।
  • भारत सरकार एशियन इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक (एआईआईबी) की तीसरी वार्षिक बैठक की मेजबानी 25 एवं 26 जून, 2018 को मुंबई में करेगी।

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