Daily Current Affairs (Hindi) - 07.02.2018

राष्ट्रीय


अग्नि 1 का सफल परीक्षण

  • 6 फरवरी को भारत ने देश में ही विकसित की गई अग्नि-1 बलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। ओडिशा के तट पर परमाणु क्षमता वाली इस मिसाइल का परिक्ष्ण सेना द्वारा किया गया। भारतीय सेना के स्ट्रेटजिक फोर्सेज़ कमांड ने 700 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइल को परीक्षण के लिए लॉन्च पैड-4 से संचालित किया।
  • यह लॉन्च पैड ओडिशा के तट से सटे बालासोर में अब्दुल कलाम द्वीप के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) में स्थित है। यह परीक्षण अग्नि-1 मिसाइल का यह 18वां वर्ज़न था जो निर्धारित समय सीमा में ही सभी मापदंडों पर खरी उतरी। इस मिसाइल को 2004 में सबसे पहले सेवा में लाया गया था।
  • जमीन से जमीन पर वार करने वाली इस सिंगल-स्टेज मिसाइल को सॉलिड प्रॉपलैंट्स द्वारा बनाया गया है। अग्नि-1 को सेना द्वारा नियमित ट्रेनिंग के तहत लॉन्च किया गया था। इस परीक्षण से एक बार फिर यह पुष्टि होती है कि सेना की यह मिसाइल बेहद कम समय में काम करने के लिए तैयार है।
  • अग्नि-1 मिसाइल में एक विशेष नेविगेशन सिस्टम है जिससे यह सुनिश्चित होता है कि यह एकदम सटीक और सही लक्ष्य तक पहुंचे। 15 मीटर लंबी अग्नि-आई का वज़न 12 टन है और यह 1,000 किलोग्राम तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।

सुदीप लखटकिया एनएसजी के महानिदेशक

  • 01 फरवरी 2018 को सुदीप लखटकिया ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के महानिदेशक के रूप में कामकाज संभाल लिया हैं. एनएसजी के प्रमुख एसपी सिंह के 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद खाली हो गया था.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने 19 जनवरी 2018 को एनएसजी प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया था. वे अगले साल जुलाई तक इस पद पर रहेंगे.

अंतर्राष्ट्रीय


मालदीव में आपातकाल

  • मालदीव में बढ़ते राजनीतिक गतिरोध के बीच राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन अब्दुल ग़यूम द्वारा 15 दिनों के आपातकाल का एलान कर दिया गया है | देश के उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे मानने से राष्ट्रपति ग़यूम ने मना कर दिया था.
  • राष्ट्रपति के दफ़्तर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है,मालदीव के अनुच्छेद 253 के तहत अगले 15 दिनों के लिए राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन अब्दुल ग़यूम ने आपातकाल का एलान कर दिया है. इस दौरान कुछ अधिकार सीमित रहेंगे, लेकिन सामान्य हलचल, सेवाएं और व्यापार इससे बेअसर रहेंगे.मालदीव सरकार यह आश्वस्त करना चाहती है कि देश के सभी नागरिकों और यहां रह रहे विदेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी |
  • आपातकाल के बाद सुरक्षा बलों को संदिग्धों को हिरासत में लेने और गिरफ़्तार करने की अतिरिक्त छूट मिल जाएगी | सरकार पहले ही संसद को बर्ख़ास्त कर चुकी है और सेना को आदेश दे चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट अगर राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की कोशिश करे तो उसे अमल में आने से रोका जाए |
  • राष्ट्रपति यमीन का शासन 02 फरवरी को अचानक संकट में आ गया था जब वहां की उच्चतम न्यायालय ने नौ सांसदों की रिहाई का आदेश दे दिया था | ऐसा होने पर संसद में विपक्ष का बहुमत हो जाता | उसके बाद राष्ट्रपति यामीन ने उच्चतम न्यायालय का आदेश मानने से इनकार कर दिया और संसद को निलंबित कर दिया. उन्होंने कुछ अधिकारियों को बर्ख़ास्त भी कर दिया |

यूनीसेफ: संकटग्रस्त देशों में सबसे अधिक निरक्षर युवा

  • संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली एजेंसी यूनीसेफ ने एक नए अध्ययन में कहा कि पांच करोड़ 90 लाख युवाओं में से लड़कियां शिक्षा से सबसे ज्यादा वंचित हैं|
  • अध्ययन के अनुसार युद्धग्रस्त और आपदाग्रस्त देशों में 15 वर्ष से 24 वर्ष की आयु के करीब 30 फीसदी युवा अनपढ़ हैं जो वैश्विक दर से तीन गुना अधिक है|

यूनिसेफ; बच्चों पर हिंसा

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि बच्चों पर हिंसा का काफी ख़राब प्रभाव पड़ रहा है| बच्चे मौजूदा संघर्षो में या आत्मघाती हमलों में मारे जा रहे हैं या फिर युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भाग खड़े होने के दौरान मारे जाते हैं|
  • मध्य पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका में यूनिसेफ के निदेशक ग्रीट कैपेलिएयरे के अनुसार जनवरी महीना को युद्धग्रस्त मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के लिए ख़राब महीना बताया | यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है कि हिंसा की घटनाओं में रोजाना बच्चे मर रहे हैं या घायल हो रहे हैं|

राजव्यवस्था


राजनेताओं हेतु विशेष न्यायालय

  • 01 मार्च 2018 से उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 11 राज्यों में 12 विशेष अदालतें काम करना शुरू कर देंगी। राजनेताओं पर चल रहे आपराधिक मुकदमों की जल्द सुनवाई के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इन अदालतों का गठन किया गया है। ये विशेष अदालतें फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर काम करेंगी।
  • उल्लेखनीय है कि राज्यों में नेताओं पर चल रहे मुकदमों की संख्या के आधार पर देश भर में 12 विशेष अदालतें स्थापित करने का फैसला लिया गया था। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में एक एक विशेष अदालत स्थापित की जा रही है। केवल दिल्ली एनसीआर में दो विशेष अदालतें गठित करने का फैसला हुआ था। जिन राज्यों में मुकदमों की संख्या 65 से 165 के बीच है वहां एक एक विशेष अदालत दी गई है। लेकिन जहां मुकदमों की संख्या इससे कम है वहां इन मामलों की सुनवाई नियमित फास्ट ट्रैक कोर्ट अथवा अतिरिक्त अदालतों में होगी।
  • विशेष अदालतों का गठन मौजूदा न्यायिक ढांचे के अंतर्गत ही किया गया है। इसका सुझाव वित्त मंत्रालय ने दिया था। वित्त मंत्रालय का मानना था कि इन अदालतों की स्थापना उद्देश्य नेताओं पर चल रहे लंबित मुकदमों की जल्द सुनवाई करना है। इसलिए इनकी स्थापना का प्रयोजन अस्थायी प्रकृति का है। इसलिए इनके लिए ज्यादा से ज्यादा मौजूदा ढांचे का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इन अदालतों के लिए वित्त मंत्रालय 7.8 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने 01 नवंबर 2017 को केंद्र सरकार को इन विशेष अदालतों का गठन करने का निर्देश दिया था।

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