Daily Current Affairs (Hindi) - 12.02.2018

राष्ट्रीय


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स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट

नीति आयोग हाल ही में ‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ शीर्षक से एक व्यापक स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य के मोर्चे पर वार्षिक प्रगति तथा एक दूसरे की तुलना में समग्र प्रदर्शन के आधार पर राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को विभिन्न श्रेणियों में रखा गया है।

यह रिपोर्ट नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव प्रीति सूडान और भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्‍टर जुनैदा अहमद की ओर से संयुक्त रुप से जारी की गयी। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के प्रदर्शन को विविधता तथा जटिलता के आधार पर वार्षिक स्तर पर आंकने के लिए एक व्यवस्थित पद्धति विकसित करने का प्रयास है। नीति आयोग की ओर से यह रिपोर्ट स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श तथा विश्व बैंक के तकनीकि सहयोग से तैयार की गयी है।

रिपोर्ट में राज्यों ओर केन्द्रशासित प्रदेशों को बडे छोटे तथा संध शासित प्रदेशों की तीन श्रेण्यिों में रखा गया है ताकि एक समान राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के बीच आसानी से तुलना की जा सके।
स्वास्थ्य सूचकांक एक भारित समग्र सूचकांक है जो बडे राज्‍यों के लिए तीन विभिन्न श्रेणियों (डोमेन) के तीन संकेतकों (ए) स्वास्थ्य परिणाम (70 प्रतिशत) (बी) शासन और सूचना (12 प्रतिशत) और (सी) प्रमुख आगत और प्रक्रियाओं (18 प्रतिशत) पर आधारित है। इसमें प्रत्येक श्रेणी का निर्धारण उसके महत्व के आधार पर किया गया है।

रिपोर्ट में बडे राज्यों में समग्र प्रदर्शन के मामले में केरल ,पंजाब और तमिलनाडु को शीर्ष स्थान दिया गया है, जबकि वार्षिक स्तर पर प्रगति के मामले में झारखंड, जम्मू-कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश को शीर्ष तीन राज्‍यों में स्थान मिला है। आधार और संदर्भ वर्ष के परिप्रेक्ष्‍य में नवजात मृत्‍यु दर, 5 वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्‍यु दर, संपूर्ण टीकाकरण, संस्‍थागत प्रसव तथा एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी पर निर्भर एचआईवी संक्रमित लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य सुधार के मामले में झारखंड, जम्‍मू-कश्‍मीर और उत्‍तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्‍छा रहा।

समग्र प्रदर्शन के मामले में छोटे राज्‍यों में मिजोरम को पहला स्‍थान मिला है, जबकि मणिपुर दूसरे स्‍थान पर है। वार्षिक स्‍तर पर प्रगति के मामले में मणिपुर को प्रथम और गोवा को दूसरा स्‍थान दिया गया है।
एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी पर निर्भर एचआईवी संक्रमित लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य सुधार, गर्भावस्‍था में देखभाल के लिए पंजीकरण, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों की गुणवत्‍ता तथा एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम की बेहतर रिपोर्टिंग तथा राज्‍य स्‍तर पर स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों की औसत संख्‍या के मामले में मणिपुर में सबसे ज्‍यादा प्रगति देखी गई।

स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में समग्र प्रदर्शन के साथ ही वार्षिक स्‍तर पर सबसे अधिक प्रगति के मामले में केंद्र शासित प्रदशों में लक्षद्वीप का प्रदर्शन सबसे अच्‍छा रहा। संस्‍थागत प्रसव, तपेदिक के सफल उपचार और स्‍वास्‍थ्‍य योजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों को सरकारी खजाने से राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन कोष के धन के आवंटन के मामले में भी राज्‍य ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

स्‍वास्‍थ्‍य सूचकांक रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि जिन राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेशों में विकास की शुरूआत निचले स्‍तर से हुई उन्‍हें उच्‍च स्‍वास्‍थ्‍य सूचकांक वाले राज्‍यों की तुलना में ज्‍यादा तेजी से प्रगति करने का लाभ मिला। उदाहरण के तौर पर केरल जहां समग्र प्रदर्शन के मामले में शीर्ष पर है वहीं दूसरी ओर इसकी प्रगति की रफ्तार धीमी पड़ चुकी है, क्‍योंकि राज्‍य में नवजात शिशु मृत्‍यु दर, 5 वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्‍यु दर, और रिप्‍लेसमेंट आधारित फर्टिलिटी की दर पहले से ही काफी घट चुकी है, जिससे इसमें और सुधार की संभावनाएं सीमित हो गई है |

हालांकि रिपोर्ट के प्रगतिशीलता मापकों से पता चलता है कि 2015 के मुकाबले 2016 में लगभग एक तिहाई राज्यों ने अपने प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की है, जिसके कारण डोमेन लक्षित हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के लिए आम चुनौतियों में कर्मचारियों के पदों को भरना, जिलों में हदय रोगो के उपचार के लिए अलग इकाइयों (सीसीयू) की स्‍थापना, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता मान्यता और मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचआरएमआईएस) को सुनियोजित करना शामिल है। इसके अतिरिक्‍त लगभग सभी बड़े राज्यों को जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी) में सुधार करने पर ध्यान देने की जरूरत भी बतायी गयी है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत दिए जाने वाले प्रोत्साहन से इस सूचकांक को जोड़ा जाना इस नए अभ्यास के महत्व को रेखांकित करता है। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि पहले साल के अध्‍ययन से कयी लाभकारी जानकारियां मिली हैं जो आने वाले वर्षों में सूचकांक को परिष्कृत करने में मार्गदर्शन करेंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के संदर्भ में डेटा प्रणाली को बेहतर बनाने, सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के लिए इनकी आवधिक उपलब्धता सुनिश्‍चित करने और निजी क्षेत्र की सेवाओं के पूर्ण वितरण में सुधार की तत्‍काल जरूरत है। आशा की जाती है कि इस सूचकांक से राज्‍य अपनी स्वास्थ्य प्रणालियों और जनसंख्या के स्वास्थ्य सुधार लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने की ओर तेजी से बढ़ सकेंगे।

स्वास्थ्य लक्ष्‍यों की प्राप्‍ति में गति लाने के वास्‍ते सहकारिता और प्रतियोगी संघवाद का लाभ उठाने के लिए स्वास्थ्य सूचकांक एक उपकरण के रूप में विकसित किया गया है। यह राज्यों और संघ शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों के लिए वार्षिक स्‍तर पर लक्ष्‍यों की प्राप्‍ति के आंकलन के लिए एक "उपकरण" के रूप में भी काम करेगा । उम्‍मीद की जाती है कि सूचकांक के वार्षिक प्रकाशन और सार्वजनिक डोमेन पर इसकी उपलब्धता सभी हितधारकों को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) लक्ष्य नंबर 3 की प्राप्‍ति के लिए सतर्क रखेगी।

सूचकांक को बेहतर बनाने की प्रक्रिया में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र के विशेषज्ञों और विकास भागीदारों से मिले सुझाव शामिल किए गए हैं। राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा उपलब्‍ध कराए गए आंकड़ों की एक स्वतंत्र मान्यता प्राप्‍त एजेंसी द्वारा जांच करायी गयी थी, जिसके बाद वेब पोर्टल पर सूचकांक मूल्य और श्रेणियां बनाई गई।


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प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्‍येता योजना को स्‍वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2018-19 से 7 वर्ष की अविध के लिए 1650 करोड़ रूपये की कुल लागत की ‘’प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्‍येता (पीएमआरएफ)’’ योजना को स्‍वीकृति दे दी है।प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्र की प्रगति और विकास के लिए अभिनव प्रयोग तथा प्रौदयोगिकी के महत्‍व पर बल दिया है। यह फेलोशिप योजना प्रधानमंत्री के नवाचार के माध्‍यम से विकास के सपने को पूरा करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण है। इस योजना की घोषणा बजट भाषण 2018-19 में की गई थी।

  • इस योजना के अंतर्गत आईआईएससी/ आईआईटी /एनआईटी / आईआईएसईआर/ आईआईआईटी से विज्ञान एंव प्रौदयोगिकी विषयों में बी.टेक.अथवा समेकित एम.टेक. अथवा एमएससी पास करने वाले अथवा अंतिम वर्ष के सर्वोत्‍तम छात्रों को आईआईटी/ आईआईएससी में पीएचडी कार्यक्रम में सीधा प्रवेश दिया जाएगा।

  • ऐसे छात्र जो पात्रता मानदंड पूरा करते हैं और जिन्‍हें पीएमआरएफ दिशा निर्देशों में निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए छांटा गया है, को पहले 2 वर्षों के लिए 70,000 रूपये प्रति माह, तीसरे वर्ष के लिए 75,000 रूपये प्रति माह तथा चौथे और 5वें वर्ष में 80,000 रूपये प्रति माह की फेलोशिप प्रदान की जाएगी। इसके अलावा प्रत्‍येक अध्‍येता को अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलनों और सेमिनारों में शोध पत्र प्रस्‍तुत करने के लिए उनकी विदेश यात्रा से संबंधित खर्च को पूरा करने के लिए 5 वर्ष की अवधि के लिए 2 लाख रूपये का शोध अनुदान दिया जाएगा। वर्ष 2018-19 की अविध से प्रारंभ 3वर्ष में अधिकतम 3000 फेलो का चयन किया जाएगा।

  • यह योजना विज्ञान और प्रौदयोगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में स्‍वदेशी रूप से शोध करने के लिए देश में उपलब्‍ध प्रतिभा के दोहन में सहायक होगी। इस योजना के तहत शोध एक ओर हमारी राष्‍ट्रीय प्राथमिकता को हल करेगा और दूसरी ओर देश की प्रमुख शैक्षिक संस्‍थाओं में गुणवत्‍तापरकसंकाय की कमी दूर करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय


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भारत और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य पांच समझौतों पर हस्ताक्षर

हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य ऊर्जा, रेलवे, जनसंसाधन और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए । विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अबू धाबी के शहजादे शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नहायान की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दोनों देशों के दीर्घकालिक ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है और उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के बीच पारस्परिक सहयोग और मित्रता बढ़ेगी।
  • उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन खाड़ी देशों की यात्रा के दूसरे चरण में 10 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। अबू धाबी प्रेजिडेन्सियल एयरपोर्ट पर उनका रस्मी स्वागत किया गया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के मद्देनजर संयुक्त अमीरात की बुर्ज खलीफा सहित कई महत्वपूर्ण इमारतों पर तिरंगे के रंगों की रोशनी की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले अगस्त 2015 में भी अबू धाबी की यात्रा पर गए थे।

आर्थिक


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प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना के तहत लक्ष्‍य में बढ़ोतरी को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 4800 करोड़ रुपये के अतिरिक्‍त आवंटन के साथ प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) के लक्ष्‍य को 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ करने को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) को महिलाओं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की ओर से व्‍यापक समर्थन मिलने और अब तक एलपीजी कनेक्‍शन से वंचित घरों को इसके दायरे में लाने के उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए ही यह निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) का संशोधित लक्ष्‍य वर्ष 2020 तक प्राप्‍त कर लिया जाएगा।

  • लक्ष्‍य में बढ़ोतरी करते वक्‍त सरकार ने प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) के क्रियान्‍वयन में आने वाली व्‍यावहारिक कठिनाई को भी दूर कर दिया है। इसके तहत मुख्‍यत: सामाजिक आर्थिक जातिगत सर्वेक्षण (एसईसीसी) की सूची में शामिल न हो सके वास्‍तविक गरीब परिवारों को इसके दायरे में लाने पर ध्‍यान केंद्रित किया गया है।

  • कैबिनेट ने एसईसीसी के तहत चिन्हित परिवारों के अलावा समस्‍त एससी/एसटी परिवारों, पीएमएवाई (ग्रामीण) एवं अंत्‍योदय अन्‍न योजना के लाभार्थियों, वनवासियों, अति पिछड़ा वर्गों (एमबीसी), चाय बागानों एवं पूर्व चाय बागानों से जुड़ी जनजातियों, द्वीपों एवं नदियों के समीप रहने वाले लोगों को भी इसके दायरे में लाने के लिए इस योजना का विस्‍तार करने को मंजूरी दे दी।

  • सरकार न केवल योजनाओं की घोषणा करती है, बल्कि वह इनके समयबद्ध क्रियान्‍वयन के लिए भी प्रतिबद्ध है। पीएमयूवाई के तहत वित्‍त वर्ष 2017-18 के आखिर तक 3 करोड़ कनेक्‍शन जारी करने का मूल लक्ष्‍य रखा गया था, लेकिन इस योजना के कारगर क्रियान्‍वयन एवं निगरानी के परिणामस्‍वरूप सभी राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 3.35 करोड़ से भी ज्‍यादा कनेक्‍शन जारी किए गए हैं जिससे मुख्‍यत: एससी/एसटी समुदाय लाभान्वित हुए हैं। कुल मिलाकर 4.65 करोड़ से ज्‍यादा आवेदन प्राप्‍त हुए हैं। इस योजना का सुगम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने 4800 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन के साथ इस योजना के तहत लक्ष्य को 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्राप्त आवेदनों की संख्या के बढ़कर 5 करोड़ के आंकड़े को छू लेने और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की ओर से मिले व्यापक समर्थन को ध्यान में रखते हुए ही यह निर्णय लिया गया है।

  • भारत सरकार देश भर में उन सभी परिवारों को एलपीजी के जरिये स्वच्छ रसोई ईंधन मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है जो अब तक इसके दायरे में नहीं आ पाये हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) की शुरुआत मई 2016 में हुई थी जिसके जरिये लाभार्थियों को नकद सहायता दी जाती है, ताकि वे बगैर किसी जमानत राशि (डिपॉजिट) के नया कनेक्शन प्राप्त कर सकें।

  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत आरम्भ में वित्त वर्ष 2016-17 से शुरू 3 वर्षों की अवधि के दौरान 8,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 5 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। यह सभी तक ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने संबंधी सरकार के समग्र फोकस का एक हिस्सा है। उन गांवों में बिजली पहुंचाई जा रही है जो अब तक इस सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीण विद्युतीकरण विजन को आगे ले जाने के लिए सौभाग्य योजना शुरू की गई है, ताकि अब तक बिजली सुविधा से वंचित घरों को बिजली कनेक्शन दिया जा सके और 31 दिसम्बर, 2018 तक सभी घरों को इसके दायरे में लाने की संभावना है। प्रधानमंत्री की मिशन नवाचार योजना के तहत सरकार और निजी एजेंसियों द्वारा देश भर में 28 करोड़ से भी ज्यादा एलईडी बल्ब वितरित किये जा चुके हैं।


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2018 मौसम के लिए कोपरा के न्यूकनतम समर्थन मूल्यं में वृद्धि को मंजूरी

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने ‘’मिलिंग कोपरा’’ की उचित औसत गुणवत्‍ता के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) 2017 के 6500 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2018 के लिए 7500 रूपये प्रति क्विंटल करने की स्‍वीकृति दे दी है।

  • ‘’बाल कोपरा’’ की उचित औसत गुणवत्‍ता के लिए भी न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य 2017 के 7685 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2018 के लिए 7750 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
  • कोपरा के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से किसानों को उपयुक्‍त न्‍यूनतम मूल्‍य सुनिश्चित होने तथा नारियल की खेती में निवेश और इस प्रकार देश में उत्‍पादन और उत्‍पादकता बढ़ने की आशा है।
  • भारतीय राष्‍ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) तथा भारतीय राष्‍ट्रीय सहकारी उपभोक्‍ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) नारियल उत्‍पादक राज्‍यों में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर मूल्‍य संवर्धन कार्य करने के लिए केन्‍द्रीय नोडल एजेंसियों के रूप में काम करना जारी रखेंगे।

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